Monday, November 23, 2009

आरती अंकलीकर के स्वर में एक सुन्दर रचना


जयपुर अतरौली घराने की नुमाइंदगी करने वाली युवा गायिका आरती अंकलीकर भारतीय शास्त्रीय संगीत परिदृष्य की लोकप्रिय कलाकार हैं.शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय संगीत दोनो ही विधाओं में उन्हें सुनना हमेशा विस्मय और सुक़ून देता है. अभी हाल ही में वे इन्दौर तशरीफ़ लाईं जिसके बारे में अपने ब्लॉग एक मुलाक़ात में जल्द ही लिखूंगा..फ़िलहाल इस रचना का आनंद लीजिये.शब्द के अनुरूप भाव को ढालने से ही कविता निहाल हो जाती है. दिव्य स्वर का स्पर्श कितना कुछ बदल देता है किसी बंदिश को ये आप यहाँ महसूस करेंगे.मालूम होवे के आरती गान-सरस्वती किशोरी अमोणकर की शिष्य हैं और फ़िल्म सरदारी बेग़म में सफल गायन कर चुकीं हैं.



Aarti Ankalikar - More Baanke Chhaliya .mp3
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Friday, July 3, 2009

ये उस्ताद अमीर ख़ाँ नहीं;गोस्वामी गोकुलोत्सवजी हैं


उनका स्वर,तान और बोल-बनाव सुनकर यही लगता है कि यह इन्दौर घराने के स्वर सम्राट उस्ताद अमीर ख़ाँ साह्ब की आवाज़ है.लेकिन हुज़ूर ये हैं पद्मश्री गोस्वामी गोकुलोत्सवजी महाराज. इन्दौर में ही बिराजते हैं और पुष्टिमार्गी श्री वल्लभाचार्य सम्प्रदाय के वरिष्ठ आचार्य हैं. संगीत जगत में तो महाराज श्री हमारे लिये इसलिये पूजनीय हैं कि हमें उनकी गायकी में अति-विलम्बित और धीर गंभीर कलेवर का रस मिलता है.वे फ़ारसी,संस्कृत,आयुर्वेद,यूनानी औषधी और सामवेद के अनन्य ज्ञाता हैं.जिस पीठ पर आचार्यश्री विराजित हैं उसी मंदिर में अपनी युवावस्था के दौरान उस्ताद अमीर ख़ाँ साहब का बहुत आना जाना रहा . आचार्य श्री ने न तो कभी उस्ताद को देखा और न कभी सुना. बस मंदिर में मौजूद अमीर ख़ाँ साहब की एकाधिक ध्वनि मुद्रिकाओं को सुनकर उन्हें लगा कि यही है वह गायकी जो मुझे आत्मसात करना है. वे लाजवाब पखावज वादक रहे हैं और ध्रुपद गायकी के भी जानकार हैं.उन्होंने मधुरपिया उपनाम से कई बंदिशे रचीं हैं.

आज सुरपेटी पर अपने ही शहर के इस विलक्षण साधक को प्रस्तुत कर अनन्य प्रसन्नता हो रही है. मौक़ा भी है और दस्तूर भी.... आसमान में बादल छाए हैं.आइये गोस्वामी गोकुलोत्सवजी के स्वर में सुनें राग मियाँ मल्हार. बंदिश उनकी स्वरचित है.

यह गायकी उस रस का आस्वादन करवाती है जो किसी और लोक से आई लगती है और जब कानों में पड़ती है तो उसके बाद कुछ और सुनने को जी नहीं करता.

Miyamalhar - Gokul...